पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं हमीरपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने संसद परिसर के बाहर मीडिया से बातचीत करते हुए कांग्रेस और उसके शीर्ष नेतृत्व पर संसदीय मर्यादाओं का लगातार उल्लंघन करने, निराधार आरोप लगाने तथा संवैधानिक संस्थाओं के प्रति अनादर का व्यवहार अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और गांधी परिवार सत्ता से बाहर रहने के बावजूद अहंकार से मुक्त नहीं हो पाए हैं और लगातार भारतीय सशस्त्र बलों, पुलिस तथा अन्य संवैधानिक संस्थाओं का अपमान कर रहे हैं। अनुराग सिंह ठाकुर ने बताया कि उन्होंने लोकसभा के नियम 222 और 223 के तहत लोकसभा अध्यक्ष को औपचारिक नोटिस देकर कांग्रेस नेताओं के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने हमेशा भारतीय सेना और भारतीय पुलिस का मनोबल गिराने का प्रयास किया है। एयर स्ट्राइक हो, सर्जिकल स्ट्राइक हो या देश की सुरक्षा से जुड़े अन्य अभियान, कांग्रेस के नेता बार-बार उन पर सवाल उठाते रहे हैं और ऐसा कथन करते हैं जिससे देश के विरोधियों को बल मिलता है। उन्होंने कहा कि अब संसद के भीतर भी कांग्रेस के नेता आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग कर मनगढ़ंत आरोप लगा रहे हैं, जो संसदीय नियमों और लोकतांत्रिक मर्यादाओं का खुला उल्लंघन है। इसी कारण उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष को नियम 222 और 223 के अंतर्गत नोटिस देकर इस आचरण के विरुद्ध सख्त कार्रवाई का आग्रह किया है।
अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि संसद के भीतर राहुल गांधी देश के गृह मंत्री पर निराधार आरोप लगाते हैं, जबकि प्रियंका गांधी मीडिया के लिए अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करती हैं। संसद से बाहर निकलने के बाद राहुल गांधी मीडिया को भाजपा का समर्थक बताते हैं और देश की पुलिस व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करते हैं। उन्होंने कहा कि यह व्यवहार गांधी परिवार के अहंकार और कांग्रेस की मानसिकता को दर्शाता है। सत्ता से बाहर रहने के बारह वर्ष बाद भी कांग्रेस नेतृत्व संवैधानिक संस्थाओं, लोकसभा अध्यक्ष और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल उठाने की अपनी आदत नहीं छोड़ पाया है।
अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि संसद जैसी सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था के भीतर असंसदीय एवं अमर्यादित भाषा का प्रयोग करना लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार का आचरण न केवल संसदीय गरिमा को ठेस पहुंचाता है बल्कि देश की संवैधानिक संस्थाओं के प्रति जनता के विश्वास को भी कमजोर करने का प्रयास करता है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि लोकसभा अध्यक्ष इस विषय पर नियमों के अनुरूप उचित एवं कठोर निर्णय लेकर संसदीय मर्यादाओं की रक्षा करेंगे।