नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेमोरियल राजकीय महाविद्यालय (एनएससीबीएम), हमीरपुर में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला के तत्वावधान में आयोजित पांच दिवसीय अंतर-महाविद्यालय युवा उत्सव ग्रुप-II (संगीत) के चौथे दिन विभिन्न संगीत प्रतियोगिताओं में प्रदेशभर के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। संगीत की विभिन्न विधाओं में प्रतिभागियों ने शानदार प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी कला, साधना और रचनात्मकता का परिचय दिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं राजकीय महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य डॉ. मधुर स्वर मिश्रा का महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. संगीता सिंह तथा आयोजन समिति द्वारा पारंपरिक हिमाचली टोपी पहनाकर स्वागत किया गया। इस अवसर पर उन्हें स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया।
अपने संबोधन में डॉ. मधुर स्वर मिश्रा ने विद्यार्थियों को संगीत के प्रति समर्पण, अनुशासन और निरंतर अभ्यास का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि संगीत केवल एक विषय नहीं, बल्कि साधना है, जिसमें परिपक्वता निरंतर रियाज से ही आती है। संगीत में उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए धैर्य, एकाग्रता, अनुशासन और निरंतर सीखने की भावना आवश्यक है। प्रत्येक प्रस्तुति कलाकार को अपनी प्रतिभा को निखारने और कुछ नया सीखने का अवसर प्रदान करती है।
उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि किसी भी प्रतियोगिता में पुरस्कार प्राप्त करना या न कर पाना किसी विद्यार्थी की प्रतिभा का अंतिम मापदंड नहीं है। प्रतियोगिताओं का वास्तविक उद्देश्य अपनी कला का प्रदर्शन करना, अन्य प्रतिभागियों से सीखना और स्वयं में सुधार लाना है। विद्यार्थियों को परिणाम की चिंता करने के बजाय अपनी प्रस्तुति की गुणवत्ता पर ध्यान देना चाहिए तथा अपनी कमियों को पहचानकर उन्हें दूर करने के लिए निरंतर प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि निरंतर मेहनत, सकारात्मक सोच और संगीत के प्रति सच्चा समर्पण ही कलाकार को आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
डॉ. मिश्रा ने भारतीय संगीत की समृद्ध परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि संगीत हमारी सांस्कृतिक विरासत, भावनाओं और सामाजिक जीवन का अभिन्न हिस्सा है। हिमाचल प्रदेश की लोक संगीत परंपरा यहां के लोकजीवन, रीति-रिवाजों, परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान को अभिव्यक्त करती है। उन्होंने भारतीय समूह गान में पहाड़ी लोकगीतों को शामिल करने की पहल की सराहना करते हुए कहा कि इससे युवा पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ी रहेगी। ऐसे प्रयास हिमाचल की समृद्ध लोक संगीत परंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे आधुनिक संगीत के साथ-साथ अपनी लोक परंपराओं को भी समझें, अपनाएं और आगे बढ़ाएं।
उन्होंने कहा कि अंतर-महाविद्यालय युवा उत्सव विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने, विभिन्न महाविद्यालयों के प्रतिभागियों से संवाद स्थापित करने और संगीत की विविध विधाओं को समझने का महत्वपूर्ण मंच प्रदान करते हैं। इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, रचनात्मकता, अनुशासन और सामूहिक सहभागिता की भावना विकसित करते हैं। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को शुभकामनाएं देते हुए संगीत के क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ने और अपनी कला को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए प्रेरित किया।
महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. संगीता सिंह ने बताया कि युवा उत्सव के अंतिम दिन 17 अक्टूबर 2026 को लोक वाद्यवृंद प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी, जिसमें 13 टीमें भाग लेंगी। इसके पश्चात दोपहर 12:30 बजे समापन एवं पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित होगा। समारोह में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला के खेल एवं युवा कार्यक्रम निदेशक प्रो. संजय शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। इस अवसर पर विभिन्न संगीत प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित किया जाएगा।
आयोजन सचिव डॉ. पूनम शर्मा ने प्रतियोगिताओं की जानकारी देते हुए बताया कि शास्त्रीय एकल गायन में 12 टीमों, शास्त्रीय वाद्ययंत्र एकल (ताल वाद्य) में 8 टीमों तथा शास्त्रीय वाद्ययंत्र एकल (गैर-ताल वाद्य) में 19 टीमों ने भाग लिया। सुगम गायन प्रतियोगिता में 28 टीमों, भारतीय समूह गान में 20 टीमों तथा लोकगीत प्रतियोगिता में 39 टीमों ने अपनी प्रस्तुतियां दीं। वहीं, पाश्चात्य एकल गायन में 21 टीमों, पाश्चात्य वाद्ययंत्र एकल में 12 टीमों ने अपनी संगीत प्रतिभा का प्रदर्शन किया। युवा उत्सव का अंतिम दिन लोक वाद्यवृंद की प्रस्तुतियों और पुरस्कार वितरण समारोह के साथ संपन्न होगा।