अनुराग सिंह ठाकुर के सवालों से घबराई कांग्रेस सरकार, जवाब देने के बजाय सफाई पेश करने में जुटी: राकेश ठाकुर

अनुराग सिंह ठाकुर के सवालों से घबराई कांग्रेस सरकार, जवाब देने के बजाय सफाई पेश करने में जुटी: राकेश ठाकुर
भाजपा जिला अध्यक्ष राकेश ठाकुर ने कहा कि जब भी भाजपा का कोई नेता प्रदेश की कांग्रेस सरकार की नाकामियों को उजागर करता है तो मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू अपनी सरकार की कमियों का आकलन करने के बजाय कांग्रेस नेताओं को मीडिया में सफाई देने के लिए आगे कर देते हैं। राकेश ठाकुर ने कहा कि ऐसा ही एक मामला पिछले सप्ताह सामने आया, जब पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं हमीरपुर के सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने जोलसप्पड़ स्थित डॉ. राधाकृष्णन राजकीय मेडिकल कॉलेज के भवन लगभग दो वर्ष पूर्व तैयार हो जाने के बावजूद आम जनता को उसकी पूर्ण सेवाएं उपलब्ध न होने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि जैसे ही अनुराग सिंह ठाकुर ने यह सच्चाई जनता के सामने रखी, मुख्यमंत्री और कांग्रेस के नेता इस विषय पर सफाई देने में जुट गए। राकेश ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस नेता आज हमीरपुर मेडिकल कॉलेज को अपनी उपलब्धि बताने का प्रयास कर रहे हैं, जबकि जनता यह जानना चाहती है कि वर्ष 2014 से पहले कांग्रेस सरकार ने इस परियोजना के लिए आखिर क्या ठोस कदम उठाए थे। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनावों से ठीक पहले 4 मार्च 2014 को मेडिकल कॉलेज की स्वीकृति अवश्य दी गई, लेकिन उस समय यह केवल एक प्रशासनिक घोषणा बनकर रह गई थी और परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए आवश्यक प्रक्रियाएं एवं निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ पाए। राकेश ठाकुर ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि कांग्रेस वास्तव में हमीरपुर मेडिकल कॉलेज को लेकर गंभीर थी तो मार्च 2014 तक वह क्या कर रही थी। उन्होंने कहा कि चुनावों से ठीक पहले स्वीकृति पत्र जारी करना जनता को प्रभावित करने का एक राजनीतिक प्रयास था। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेताओं ने उस समय केवल श्रेय लेने की राजनीति की, जबकि परियोजना को वास्तविक गति बाद के वर्षों में मिली। राकेश ठाकुर ने कहा कि केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार बनने के बाद मेडिकल कॉलेज परियोजना के लिए वित्तीय प्रावधानों और कार्यान्वयन की दिशा में ठोस कदम उठाए गए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की योजना के तहत इस मेडिकल कॉलेज के लिए लगभग 180 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता स्वीकृत की गई, जबकि मूल परियोजना लागत लगभग 189 करोड़ रुपये निर्धारित की गई थी। बाद के वर्षों में परियोजना का आकार और लागत बढ़ती गई तथा वर्तमान में इसकी लागत 400 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच चुकी है। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज की पहली एमबीबीएस बैच वर्ष 2018 में शुरू हुई और नए परिसर के निर्माण के लिए आधारशिला भी वर्ष 2018 में रखी गई। इसके बाद सितंबर 2020 में जोलसप्पड़-थाई क्षेत्र में स्थायी परिसर के निर्माण कार्य ने वास्तविक रूप से गति पकड़ी और सीपीडब्ल्यूडी के माध्यम से निर्माण कार्य शुरू हुआ। उन्होंने कहा कि भाजपा का सीधा सवाल है कि यदि भवनों का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है तो फिर नियमित कक्षाओं, अस्पताल सेवाओं और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं को नए परिसर से पूर्ण रूप से शुरू करने में देरी क्यों हो रही है। जनता को यह जानने का अधिकार है कि इस महत्वपूर्ण स्वास्थ्य परियोजना के संचालन में आखिर कौन-सी बाधाएं हैं। उन्होंने कहा कि अनुराग सिंह ठाकुर ने केवल जनता की आवाज उठाई है और कांग्रेस सरकार को इस सवाल का तथ्यात्मक जवाब देना चाहिए कि तैयार भवनों के बावजूद हमीरपुर और आसपास के लाखों लोगों को अभी तक मेडिकल कॉलेज की पूर्ण सुविधाएं कब मिलेंगी।