पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं हमीरपुर संसदीय क्षेत्र से सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा है कि वन नेशन, वन इलेक्शन व्यवस्था देश में सुशासन को नई मजबूती प्रदान करेगी। इससे बार-बार होने वाले चुनावों पर होने वाले व्यय में कमी आएगी, विकास कार्यों में निरंतरता बनी रहेगी और सरकारें अधिक प्रभावी ढंग से जनकल्याण एवं विकास पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगी।
लखनऊ में वन नेशन, वन इलेक्शन विषय पर संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के अध्ययन दौरे के दौरान समिति ने उत्तर प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श किया। बैठक में मुख्य सचिव एस.पी. गोयल, पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण, मुख्य निर्वाचन अधिकारी तथा वित्त, गृह, शिक्षा, पर्यटन, कृषि, उद्योग, स्वास्थ्य एवं श्रम विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने एक साथ चुनाव कराने के प्रशासनिक, वित्तीय और सुशासन संबंधी पहलुओं पर अपने सुझाव दिए।
समिति ने इसके बाद नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, भारतीय खाद्य निगम, नेफेड, नॉर्दर्न रेलवे, रेल विकास निगम लिमिटेड, कोल इंडिया लिमिटेड और पावरग्रिड सहित विभिन्न सार्वजनिक उपक्रमों के प्रतिनिधियों से भी संवाद किया। इस दौरान बार-बार होने वाले चुनावों का प्रशासनिक व्यवस्था, परियोजनाओं के क्रियान्वयन और जनसेवाओं पर पड़ने वाले प्रभाव पर चर्चा की गई।
विधिक पक्षों पर व्यापक विचार-विमर्श के लिए समिति ने उत्तर प्रदेश बार काउंसिल, अवध बार एसोसिएशन तथा इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की लखनऊ पीठ के वरिष्ठ अधिवक्ताओं से भी सुझाव लिए।
अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि संयुक्त संसदीय समिति देशभर में सभी हितधारकों से संवाद कर प्रत्येक पक्ष का गंभीरता से अध्ययन कर रही है, ताकि व्यापक सहमति और व्यावहारिक अनुभवों के आधार पर अपनी अनुशंसाएं तैयार की जा सकें।
उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार, सार्वजनिक उपक्रमों के प्रतिनिधियों, विधि विशेषज्ञों तथा अधिवक्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि लखनऊ अध्ययन दौरे से समिति को वन नेशन, वन इलेक्शन के व्यावहारिक पहलुओं को समझने में महत्वपूर्ण सहायता मिली है। यह पहल विकसित भारत के निर्माण के लिए अधिक सक्षम, स्थिर और विकासोन्मुखी शासन व्यवस्था स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।