अवैध खनन मामले ने अब खुलकर सियासी रंग ले लिया है और बयानबाजी तल्ख होती जा रही है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता राजेंद्र राणा ने सीधे हमीरपुर सदर थाना पहुंचकर आरोपों में घिरे विधायक आशीष शर्मा के चाचा व भाई से मुलाकात की और इसके बाद प्रेस को सम्बोधित करते हुए प्रदेश सरकार पर जमकर हमला बोला। राणा ने बिना लाग-लपेट कहा कि प्रदेश की पुलिस अब “कानून की नहीं, सरकार की भाषा” बोल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारी निष्पक्ष जांच छोड़कर सत्ता के इशारों पर “कटपुतली” बन चुके हैं और राजनीतिक विरोधियों को फंसाने के लिए झूठे मुकदमे गढ़े जा रहे हैं। सुजानपुर के कथित अवैध खनन मामले को लेकर राणा ने सरकार को सीधे कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि एक बंद पड़े स्टोन क्रशर को आधार बनाकर “स्क्रिप्टेड केस” तैयार किया गया, फर्जी आरोप गढ़े गए और उसे कोर्ट में पेश कर दिया गया—वो भी सिर्फ इसलिए क्योंकि निशाने पर राजनीतिक विरोधी हैं।
राणा यहीं नहीं रुके। उन्होंने मुख्यमंत्री को खुली चुनौती देते हुए कहा कि अगर सच में भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़नी है तो देहरा उपचुनाव के दौरान “कैश फॉर वोट” के आरोपों की जांच करवाई जाए। उन्होंने दावा किया कि कांगड़ा बैंक के जरिए महिला मंडलों को अवैध रूप से पैसे बांटे गए, लेकिन सरकार इस पर चुप्पी साधे बैठी है क्योंकि मामला “घर के अंदर” का है। सरकार पर “मित्रों को खुली लूट की छूट” देने का आरोप लगाते हुए राणा ने मुख्यमंत्री के एक करीबी सलाहकार की संपत्ति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जो व्यक्ति कभी मामूली हालात में था, आज करोड़ों की संपत्ति और आलीशान बंगले कैसे खड़े कर रहा है—इसकी जांच क्यों नहीं हो रही? राणा ने आरोप लगाया कि सरकार जांच से भाग रही है और उल्टा अपने चहेतों को पद और भर्तियों के जरिए फायदा पहुंचा रही है। पुलिस प्रशासन को भी राणा ने सख्त लहजे में चेताया—“वर्दी की गरिमा बचाइए, सत्ता की कठपुतली मत बनिए… क्योंकि वक्त बदलते देर नहीं लगती।”