कारगिल युद्ध में अटल जी के दृढ़ नेतृत्व ने बढ़ाया सेना का मनोबल: प्रो. प्रेम कुमार धूमल
कारगिल युद्ध में अटल जी के दृढ़ नेतृत्व ने बढ़ाया सेना का मनोबल: प्रो. प्रेम कुमार धूमल
सेना का अनुशासन और राष्ट्रसेवा की भावना पूर्व सैनिकों की सबसे बड़ी पहचान, वन रैंक वन पेंशन से लेकर शहीदों के परिवारों के कल्याण तक पूर्व सैनिकों के हितों को दिया महत्व: प्रो. प्रेम कुमार धूमल
भारतीय जनता पार्टी पूर्व सैनिक प्रकोष्ठ के प्रदेश एवं जिला स्तर के पदाधिकारियों ने आज समीरपुर में पूर्व मुख्यमंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता प्रोफेसर प्रेम कुमार धूमल से उनके निवास स्थान पर भेंट की। इस अवसर पर प्रो. धूमल ने पूर्व सैनिक प्रकोष्ठ के पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि सेना के जवान नौकरी के दौरान ही नहीं, बल्कि सेवानिवृत्ति के बाद भी अनुशासन और राष्ट्रसेवा की भावना से परिपूर्ण रहते हैं। यही कारण है कि सेवानिवृत्ति के पश्चात भी पूर्व सैनिक सामाजिक जीवन में अनुशासन, समर्पण और देशसेवा के मूल्यों को जीवित रखते हैं। उन्होंने कहा कि जब पूर्व सैनिक भारतीय जनता पार्टी के पूर्व सैनिक प्रकोष्ठ के माध्यम से संगठन में कार्य करते हैं, तो पार्टी में भी अनुशासन, राष्ट्रभक्ति और देशसेवा की भावना का संचार होता है। पूर्व सैनिकों का अनुभव, समर्पण और राष्ट्र के प्रति उनकी निष्ठा संगठन की महत्वपूर्ण ताकत है।
प्रो. धूमल ने वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान के अपने अनुभव साझा करते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व और राष्ट्रहित के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को याद किया। उन्होंने बताया कि कारगिल संघर्ष के दौरान वे हिमाचल प्रदेश में तत्कालीन भाजपा प्रदेश प्रभारी नरेंद्र मोदी के साथ शिमला में मौजूद थे। जब उन्हें समाचारों के माध्यम से जानकारी मिली कि प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी युद्धग्रस्त कारगिल क्षेत्र में सैनिकों से मिलने पहुंचे हैं, तो उन्होंने और नरेंद्र मोदी ने भी वहां जाकर सैनिकों का मनोबल बढ़ाने का निर्णय लिया। इसके बाद 4 जुलाई 1999 को वे नरेंद्र मोदी के साथ कारगिल पहुंचे। इससे पहले श्रीनगर हवाई अड्डे पर तत्कालीन जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने उनका स्वागत किया।
प्रो. धूमल ने बताया कि डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने बातचीत के दौरान कहा कि जम्मू-कश्मीर का मुख्यमंत्री होने के नाते उनका युद्धग्रस्त क्षेत्र में पहुंचना स्वाभाविक था, लेकिन अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों में से प्रो. धूमल पहले ऐसे मुख्यमंत्री थे, जो इस संघर्ष के दौरान वहां पहुंचे थे। उन्होंने इस पहल के लिए प्रो. धूमल और नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया।
पूर्व सैनिकों के कल्याण के लिए किए गए प्रयासों का उल्लेख करते हुए प्रो. धूमल ने कहा कि वर्ष 1990 में पहली बार लोकसभा में वन रैंक वन पेंशन (OROP) का मुद्दा उठाया गया था। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में सुजानपुर की रैली में नरेंद्र मोदी ने वन रैंक वन पेंशन लागू करने का वादा किया था, जिसे केंद्र में सरकार बनने के बाद पूरा किया गया। उन्होंने कहा कि पूर्व सैनिकों की लंबे समय से चली आ रही इस मांग का समाधान उनके सम्मान और अधिकारों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम था।
प्रो. धूमल ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में भूतपूर्व सैनिकों के लिए पूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना (ECHS) लागू की गई, जिससे सेवानिवृत्त सैनिकों और उनके परिवारों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिली। उन्होंने कहा कि सैनिक देश की सीमाओं की रक्षा करते हैं और उनका तथा उनके परिवारों का सम्मान एवं कल्याण सुनिश्चित करना पूरे राष्ट्र का दायित्व है।
कारगिल युद्ध में शहीद हुए हिमाचल प्रदेश के सैनिकों के परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए प्रो. धूमल ने कहा कि उस समय उन्होंने स्वयं 52 शहीद सैनिकों के घर-घर जाकर उनके परिजनों से मुलाकात की और आर्थिक सहायता प्रदान की। शहीदों के आश्रितों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से पेट्रोल पंप और गैस एजेंसियां उपलब्ध करवाने के प्रयास किए गए। साथ ही, उनके बच्चों की शिक्षा के लिए निःशुल्क शिक्षा का प्रावधान भी किया गया, ताकि शहादत के बाद परिवारों को भविष्य की चुनौतियों का सामना करने में सहयोग मिल सके।
प्रो. धूमल ने कहा कि सैनिकों और पूर्व सैनिकों का सम्मान केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उनकी समस्याओं का समाधान, उनके परिवारों की देखभाल और उनके बच्चों के भविष्य की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने पूर्व सैनिकों से आह्वान किया कि वे अपने अनुभव, अनुशासन और राष्ट्रसेवा के संकल्प के माध्यम से समाज तथा संगठन को निरंतर दिशा देते रहें।
इस अवसर पर पूर्व सैनिक प्रकोष्ठ के पदाधिकारियों ने प्रो. धूमल के अनुभवों को प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि पूर्व सैनिकों की भूमिका राष्ट्र निर्माण और सामाजिक जीवन में महत्वपूर्ण बनी हुई है।