पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं हमीरपुर से सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने आज लोकसभा में अतारांकित प्रश्न के माध्यम से भगत अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, सोलन से जुड़े मामले को प्रमुखता से उठाते हुए बैंक पर लगाए गए प्रतिबंधों, उसकी वित्तीय स्थिति तथा हजारों जमाकर्ताओं एवं शेयरधारकों के हितों की सुरक्षा के लिए उठाए जा रहे कदमों की विस्तृत जानकारी मांगी।
सरकार ने अपने उत्तर में बताया कि भारतीय रिजर्व बैंक ने जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा के उद्देश्य से अक्टूबर 2025 में बैंक पर परिचालन संबंधी प्रतिबंध लगाए थे। इसके तहत प्रत्येक जमाकर्ता के लिए निकासी की सीमा ₹10,000 निर्धारित की गई थी। यह प्रतिबंध 8 अक्टूबर 2026 तक प्रभावी रहेंगे, जिनकी समय-समय पर समीक्षा की जाएगी।
सरकार ने अनुराग सिंह ठाकुर द्वारा पूछे गए प्रश्नों के उत्तर में बताया कि बैंक के 70,849 जमाकर्ता, ₹467.46 करोड़ की कुल जमा राशि तथा 10,590 शेयरधारक इन प्रतिबंधों से प्रभावित हैं। सरकार ने यह भी बताया कि बैंक की सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां (जी ऐन पी ए) ₹116.19 करोड़ (52.45 प्रतिशत) हैं। साथ ही स्पष्ट किया गया कि बैंक के किसी वित्तीय रूप से मजबूत सहकारी बैंक में विलय का कोई प्रस्ताव भारतीय रिजर्व बैंक को प्राप्त नहीं हुआ है।
सरकार ने यह भी जानकारी दी कि डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन के माध्यम से अब तक 12,653 जमाकर्ताओं को ₹191.57 करोड़ का बीमा भुगतान किया जा चुका है, जबकि ₹102.28 करोड़ के दावों का निपटान अभी लंबित है।
संसद को यह भी अवगत कराया गया कि हिमाचल प्रदेश के सहकारिता विभाग के रजिस्ट्रार ने बैंक के संचालन में गंभीर अनियमितताओं एवं प्रशासनिक विफलताओं की पहचान की थी। बार-बार निर्देश और समीक्षा बैठकों के बावजूद बैंक प्रबंधन द्वारा आवश्यक सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए। इसके परिणामस्वरूप 19 जून 2026 को बैंक के निदेशक मंडल को निलंबित कर राज्य सरकार के तीन अधिकारियों को प्रशासक नियुक्त किया गया, जो वर्तमान में बैंक का संचालन कर रहे हैं।
इस विषय को संसद में उठाकर अनुराग सिंह ठाकुर ने भगत अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक की वित्तीय स्थिति को लेकर पारदर्शिता सुनिश्चित करने, जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा करने तथा बैंक के प्रति जनता के विश्वास को पुनः स्थापित करने के लिए सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों की जानकारी देश और प्रदेश के लोगों के समक्ष रखने का प्रयास किया।