हिमालयी क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर संचालन को सुरक्षित बनाने के लिए केंद्र सरकार के व्यापक कदम
हिमालयी क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर संचालन को सुरक्षित बनाने के लिए केंद्र सरकार के व्यापक कदम
डीजीसीए ने 2025 में उच्च हिमालयी क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर ऑपरेटरों के 8 विशेष सुरक्षा ऑडिट किए, यात्री सुरक्षा मोदी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता : अनुराग सिंह ठाकुर
हमीरपुर संसदीय क्षेत्र से सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर द्वारा लोकसभा में पूछे गए अतारांकित प्रश्न के उत्तर में नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने बताया कि केंद्र सरकार हिमालयी राज्यों में हेलीकॉप्टर संचालन को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के लिए व्यापक कदम उठा रही है। सरकार ने उच्च हिमालयी क्षेत्रों में यात्रियों और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कड़े सुरक्षा मानक, आधुनिक तकनीकों और सुदृढ़ निगरानी व्यवस्था को लागू किया है।
अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि मोदी सरकार के लिए प्रत्येक यात्री की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और प्रतिकूल मौसम वाले क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर संचालन को सुरक्षित बनाने के लिए डीजीसीए द्वारा वर्ष 2023 में जारी ऑपरेशन सर्कुलर (OC-02) के अंतर्गत तीर्थयात्रा संचालन हेतु विशेष मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू की गई है। इन दिशानिर्देशों का उद्देश्य दुर्घटनाओं की संभावना को न्यूनतम करना तथा सुरक्षित उड़ान संचालन सुनिश्चित करना है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 से 2025 के बीच उत्तराखंड में हुई छह हेलीकॉप्टर दुर्घटनाओं के मद्देनज़र डीजीसीए ने वर्ष 2025 के दौरान उच्च हिमालयी क्षेत्रों में संचालित हेलीकॉप्टर ऑपरेटरों के आठ विशेष सुरक्षा ऑडिट किए। इन ऑडिट में उड़ान ड्यूटी समय सीमा, रखरखाव प्रक्रियाओं, स्लॉट आवंटन, परिचालन मानकों और सुरक्षा अनुपालन की गहन समीक्षा की गई, जिससे ऑपरेटरों की जवाबदेही और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया।
अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि मंत्रालय ने हिमालयी क्षेत्रों की विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अत्याधुनिक तकनीकों को अनिवार्य बनाया है। इनमें ऑटोमेटेड वेदर ऑब्जर्विंग सिस्टम, वास्तविक समय आधारित सैटेलाइट हेली-ट्रैकिंग, लाइव वेदर कैमरे तथा जीपीएस आधारित कोप्टर रूट शामिल हैं। इसके अतिरिक्त ऊंचाई वाले हेलिपैड पर हेलीकॉप्टर के अधिकतम भार की सीमा निर्धारित की गई है, प्रति घंटे संचालित होने वाली शटल उड़ानों तथा प्रतिदिन चार्टर उड़ानों की संख्या भी सीमित की गई है, ताकि अत्यधिक दबाव और मानवीय त्रुटियों से बचा जा सके।
उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा के दौरान सभी हेलीकॉप्टरों में हेली-ट्रैकर अनिवार्य कर दिए गए हैं। इनसे प्राप्त वास्तविक समय की जानकारी देहरादून के सहस्त्रधारा स्थित इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर में लगातार मॉनिटर की जाती है। किसी भी आपात स्थिति में हेलीकॉप्टर की सटीक लोकेशन तुरंत उपलब्ध होने से राहत एवं बचाव अभियान तेजी से संचालित किया जा सकता है।
अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि राज्य सरकारों, रक्षा बलों और राज्य आपदा मोचन बल के साथ समन्वित व्यवस्था विकसित की गई है, जिससे खोज एवं बचाव अभियान और अधिक प्रभावी बन सके। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक, कड़े सुरक्षा मानकों और मजबूत नियामकीय निगरानी के माध्यम से केंद्र सरकार हिमालयी क्षेत्रों में श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए सुरक्षित एवं विश्वसनीय हेलीकॉप्टर सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।