ऊना बल्क ड्रग पार्क को केंद्र से ₹1000 करोड़ की मंजूरी, हिमाचल में फार्मा उद्योग को मिलेगी नई उड़ान: अनुराग सिंह ठाकुर

₹8,000-10,000 करोड़ के निवेश और 20 हजार तक रोजगार सृजन का मार्ग होगा प्रशस्त, आत्मनिर्भर भारत अभियान को मिलेगी मजबूती

ऊना बल्क ड्रग पार्क को केंद्र से ₹1000 करोड़ की मंजूरी, हिमाचल में फार्मा उद्योग को मिलेगी नई उड़ान: अनुराग सिंह ठाकुर
हमीरपुर संसदीय क्षेत्र से सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर द्वारा लोकसभा में पूछे गए अतारांकित प्रश्न के उत्तर में केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय ने बताया है कि ऊना जिले के हरोली में स्थापित किए जा रहे बल्क ड्रग पार्क के कॉमन इंफ्रास्ट्रक्चर फैसिलिटीज (CIF) के विकास के लिए केंद्र सरकार ने प्रमोशन ऑफ बल्क ड्रग पार्क्स योजना के अंतर्गत ₹1000 करोड़ की ग्रांट-इन-एड स्वीकृत की है। परियोजना की कुल अनुमानित लागत ₹1923 करोड़ है, जबकि कॉमन इंफ्रास्ट्रक्चर फैसिलिटीज की लागत ₹1118.46 करोड़ निर्धारित की गई है। मंत्रालय के अनुसार पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए 5 मिलियन लीटर प्रतिदिन (MLD) क्षमता वाले जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ZLD) आधारित कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) को ₹244.43 करोड़ की लागत से स्वीकृति दी गई है। परियोजना को 25 सितंबर 2025 को पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है तथा सिविल कार्यों, साइट डिमार्केशन और स्टीम जनरेशन से जुड़े प्रमुख टेंडर आवंटित किए जा चुके हैं। पहले चरण में 800 एकड़ क्षेत्र में कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि यह परियोजना हिमाचल प्रदेश के औद्योगिक विकास की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि है। उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश को देश के केवल तीन बल्क ड्रग पार्कों में स्थान दिलाना निरंतर प्रयासों, दूरदर्शी सोच और केंद्र सरकार के सहयोग का परिणाम है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना प्रदेश को देश के प्रमुख फार्मास्यूटिकल विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करेगी और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को नई गति प्रदान करेगी। अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि बल्क ड्रग पार्क के विकसित होने से प्रदेश में ₹8,000 से ₹10,000 करोड़ तक का निवेश आकर्षित होने की संभावना है तथा 15,000 से 20,000 युवाओं के लिए प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे। उन्होंने कहा कि पार्क में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, सॉल्वेंट रिकवरी सिस्टम, केंद्रीकृत यूटिलिटीज, विश्वसनीय विद्युत आपूर्ति और पर्याप्त जल उपलब्धता जैसी विश्वस्तरीय साझा सुविधाएं विकसित की जा रही हैं, जिससे उद्योगों की पूंजीगत एवं परिचालन लागत में उल्लेखनीय कमी आएगी। उन्होंने कहा कि यह परियोजना देश में एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रीडिएंट्स (API) तथा की स्टार्टिंग मैटेरियल्स (KSM) के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देगी और आयात पर निर्भरता कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। आधुनिक अवसंरचना और मजबूत पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों के साथ हरोली का बल्क ड्रग पार्क भारत को वैश्विक फार्मास्यूटिकल आपूर्ति श्रृंखला में और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के साथ-साथ आत्मनिर्भर भारत अभियान को भी नई मजबूती प्रदान करेगा।