पहले मुख्यमंत्री सड़कें बनाते थे - पानी देते थे, आज वाले सिर्फ एफआईआर बनाते हैं: राजेंद्र राणा
पहले मुख्यमंत्री सड़कें बनाते थे - पानी देते थे, आज वाले सिर्फ एफआईआर बनाते हैं: राजेंद्र राणा
प्रदेश भाजपा प्रवक्ता का कांग्रेस सरकार पर तंज; कहा: केंद्रीय गृह मंत्री के समक्ष भाजपा रखेगी कानून व्यवस्था का काला चिट्ठा, हिमाचल में अब लॉ एंड ऑर्डर की बजाय आर्डर एंड लॉ की स्थिति
प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ प्रवक्ता एवं पूर्व विधायक राजेंद्र राणा ने कानून व्यवस्था को लेकर सुक्खू सरकार पर बड़ा हमला बोला है। हमीरपुर में प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि हिमाचल में पहले मुख्यमंत्री सड़कों, पानी और आधुनिक निर्माणों के लिए जाने जाते थे। लेकिन आज दुर्भाग्य से हिमाचल को एफआईआर वाले मुख्यमंत्री मिले हैं। वर्तमान सरकार और एफआईआर एक-दूसरे के पूरक बन गए हैं। सरकार के हर काम में अब सिर्फ एफआईआर ही नजर आती है। एफआईआर का मतलब है कि फेल इन राज, फाइल इधर रखो और फर्जी इंसाफ रजिस्टर। ये कांग्रेस की सरकार नहीं है, ये एफआईआर सरकार है। देश भर में लॉ एंड ऑर्डर से सभी राज्य चल रहे हैं और प्रदेश में कांग्रेस सरकार ने इसे आर्डर एंड लॉ में तब्दील कर दिया है। द्वेष और बदले की भावना में सरकार पहले आर्डर निकाल रही है और बाद में मामले में कानून देखा जा रहा है। संजौली में स्कूल चलाने वाली बहन की गोलियों से हत्या, सरकाघाट में कॉलेज जाती बेटी की हत्या, ऊना में दिनदहाड़े गोलियां चलना, बिलासपुर में पुलिस की मौजूदगी में कुल्हाड़ी से हमला और कुल्लू में महिला के साथ हुई दरिंदगी का मामला तो सुर्खियों में है ही। मुख्यमंत्री के गृह जिला हमीरपुर में ही 2-3 मामलों में महिलाओं को जान से हाथ धोना पड़ा। विमल नेगी जी को इंसाफ दिलाने के लिए ही परिजनों को दर-दर भटकना पड़ा और आखिर में हाईकोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई जांच मिली। आखिर सरकार इस मामले को दबाना क्यों चाहती थी? किन चहेतों को बचाने की कोशिश हो रही है? अब ये परतें भी खुलने लगी हैं। प्रदेश सरकार का 3 साल का रिपोर्ट कार्ड चौंकाने वाला है। हत्याएं, यौन शौषण और हिंसक अपराध बढ़े हैं। महिलाओं और बच्चों के खिलाफ मामले साल दर बढ़ते जा रहे हैं। क्या यही है कांग्रेस का "व्यवस्था परिवर्तन", जिसमें जंगलराज चला है। ये इत्तेफाक नहीं, सरकार की नाकामी का सबूत है। कांग्रेस सरकार ने वादा किया था टूरिज्म कैपिटल बनाएंगे और बना दी अपराध कैपिटल। वादा किया था स्टार्टअप की राजधानी और बना दिया एफआईआर की राजधानी। पहले पुलिस एफआईआर के बाद अपराधी पकड़ती थी। अब सरकार एफआईआर के बाद मीडिया को फोटो देती है। उन्होंने कहा कि अपराधियों पर नकेल कसने को स्पेशल टास्क फोर्स बने और गृह मंत्री यानि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दें, क्योंकि उनसे न कानून व्यवस्था संभाली जा रही है और न ही आर्थिक वित्तीय व्यवस्था। उन्होंने कहा कि हिमाचल की जनता ने वोट सुशासन के लिए दिया था, परेशान होने के लिए नहीं। रोजगार देने थे, बदले में अपराध मिले। जनता को सुरक्षा देनी थी, लेकिन आए दिन लाशें मिल रही हैं। राजेंद्र राणा ने कहा कि पूर्व जयराम सरकार ने बदले और द्वेष की राजनीति को खत्म कर स्वच्छ परंपरा शुरू की थी, लेकिन वर्तमान सरकार ने पहले दिन से ही प्रतिशोध की राजनीति चलाई है। मुख्यमंत्री जी बताएं, स्कूल में बहन सुरक्षित नहीं, कॉलेज में बेटी सुरक्षित नहीं, बाजार में व्यापारी सुरक्षित नहीं तो जनता जाए तो जाए कहां? पूर्व विधायक ने कहा कि प्रदेश में गुंडागर्दी बढ़ रही है और सरकार विरोधियों और अपनी नाकामियों का भंडाफोड़ करने वालों पर कार्रवाई और षड्यंत्र रचने में लगी है। उन्होंने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को सलाह दी कि सरकार की कठपुतली और एजेंट बनकर काम न करें। कांग्रेस सरकार चंद महीनों की मेहमान है। इसलिए अधिकारियों को भारतीय न्याय संहिता की धाराएं 255 व 256 याद रखनी चाहिए। बदले की भावना में दर्ज झूठे मामलों के कारण रिटायरमेंट के बाद उनके पेंशन और अन्य वित्तीय लाभ भी रुक जाते हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल की बिगड़ी कानून व्यवस्था, झूठे मुकद्दमों और निर्दोष लोगों को धमकाने-डराने वाली प्रदेश सरकार की नाकामियों को लेकर भाजपा जल्द ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को अवगत करवाएगी।