सड़क हादसों को रोकने के लिए उठाएं आवश्यक कदम : गंधर्वा राठौड़
सड़क हादसों को रोकने के लिए उठाएं आवश्यक कदम : गंधर्वा राठौड़
घायलों के डेढ लाख रुपये तक के कैशलैस इलाज के लिए तुरंत अपलोड हो डाटा
डाटा अपलोडिंग के लिए स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों एवं डॉक्टरों को करें प्रशिक्षित
उपायुक्त गंधर्वा राठौड़ ने कहा है कि जिला में सड़क दुर्घटनाओं को रोकने तथा इनसे होने वाली मौतों की संख्या को शून्य तक लाने के लिए लोक निर्माण विभाग, नेशनल हाईवे अथॉरिटी, पुलिस, परिवहन विभाग और अन्य संबंधित विभाग सभी आवश्यक कदम उठाएं। इसके अलावा यातायात के नियमों की अक्षरशः अनुपालना सुनिश्चित करने के लिए आम लोगांे को भी जागरुक करें। बुधवार को जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए उपायुक्त ने ये निर्देश दिए।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 के दौरान जिला में कुल 67 सड़क हादसे हुए। जबकि, वर्ष 2024 में 84 हादसे हुए थे। हालांकि, पिछले एक वर्ष के दौरान सड़क हादसों में कमी आई है, लेकिन अभी भी काफी सुधार की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि जिला से गुजरने वाले सभी नेशनल हाईवेज और एक्सप्रेस हाईवेज पर स्पीड लिमिट के बोर्ड होने चाहिए। स्पीड ब्रेकर्स, जैबरा क्रासिंग्स और चौक-चौराहों पर सही मार्किंग होनी चाहिए। टैªफिक डायवर्जन, पार्किंग और नो पार्किंग जोन इत्यादि के लिए भी उपयुक्त साइज के बोर्ड हों। शिमला, चंडीगढ़, कांगड़ा और पालमपुर की ओर आवाजाही करने वाले वाहनों को बाईपास से भेजने के लिए भी सभी प्रमुख स्थानों पर दिशासूचक बोर्ड लगाएं। उपायुक्त ने कहा कि दुर्घटना की आशंका वाले स्थानों की मरम्मत एवं सुधार के लिए पीडब्ल्यूडी और एनएच के अधिकारी त्वरित कदम उठाएं।
उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति की जान बचाने के लिए तत्काल सहायता प्रदान करने वाले नेक व्यक्तियों को राहवीर योजना के तहत ‘गुड सेमेरिटन’ पुरस्कार दिया जाता है। जिला में अभी तक 7 लोगों को यह पुरस्कार दिया जा चुका है। उपायुक्त ने बताया कि सड़क दुर्घटनाओं के घायलों के लिए अब आयुष्मान भारत योजना के तहत सूचीबद्ध सभी अस्पतालों और अन्य सूचीबद्ध अस्पतालों में डेढ लाख रुपये तक के मुफ्त एवं कैशलैस इलाज की व्यवस्था की गई है। इस योजना के क्रियान्वयन में पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। इससे संबंधित डाटा अपलोडिंग में कोई दिक्कत आ रही है तो डॉक्टरों एवं स्वास्थ्य कर्मियों के प्रशिक्षण की व्यवस्था होनी चाहिए।
उपायुक्त ने कहा कि सड़क सुरक्षा से संबंधित प्रबंधों और जागरुकता गतिविधियों के लिए विभिन्न विभागों को नियमित रूप से बजट आवंटित किया जाता है। हर विभाग के पास इसके व्यय के लिए प्रभावी योजना होनी चाहिए।
बैठक में एसपी बलवीर सिंह, एडीसी अभिषेक गर्ग और अन्य अधिकारियों ने अपने-अपने विभागों से संबंधित रिपोर्ट पेश की। जबकि, समिति के सचिव एवं लोक निर्माण विभाग के अधिशाषी अभियंता दीपक कपिल ने सभी मुद्दों का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत किया।