पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं हमीरपुर संसदीय क्षेत्र से सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने आज हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (CUH), महेंद्रगढ़ में खेल सुविधाओं को आधुनिक बनाने के उद्देश्य से ₹10.5 करोड़ की लागत से निर्मित अंतरराष्ट्रीय मानकों वाले सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक का उद्घाटन कर इसे खिलाड़ियों एवं विश्वविद्यालय के छात्रों को समर्पित किया। इस अवसर पर उन्होंने छात्रों के साथ विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका विषय पर संवाद करते हुए कहा कि पिछले एक दशक में मोदी सरकार ने 100 वर्षों के बराबर उपलब्धियाँ हासिल करने का कार्य किया है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय परिसर में 400 मीटर का अंतरराष्ट्रीय मानकों वाला सिंथेटिक ट्रैक खेल अवसंरचना को सुदृढ़ करेगा और खिलाड़ियों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराएगा। यह सुविधा न केवल विश्वविद्यालय के छात्रों बल्कि क्षेत्र के उभरते एथलीटों के लिए भी अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगी, जिससे वे अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए स्वयं को बेहतर ढंग से तैयार कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि जब कोई युवा मैदान पर पसीना बहाता है, तो वह केवल अपनी फिटनेस नहीं बनाता, बल्कि अपने भीतर मजबूत चरित्र और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना भी विकसित करता है।
उन्होंने कहा कि 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प लिया गया है। जब देश स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे करेगा, तब तक इस लक्ष्य की प्राप्ति की दिशा में युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी। आज देश के युवाओं में अपार ऊर्जा है और सरकार उनके लिए नए अवसर सृजित कर रही है। नई पीढ़ी की ऊर्जा और पुरानी पीढ़ी का अनुभव विकसित भारत की यात्रा को गति प्रदान कर रहा है। एक भारत श्रेष्ठ भारत के संकल्प के तहत देश को विकास, विरासत और राष्ट्रवाद के सूत्र में पिरोने का लक्ष्य रखा गया है।
अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि आने वाले दशकों में भारत अपनी युवा शक्ति के दम पर विश्व नेतृत्व करेगा। वर्तमान में देश की लगभग 65 प्रतिशत आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है और विशाल युवा वर्ग देश की सबसे बड़ी ताकत है। यह युवा शक्ति केवल सहभागी नहीं, बल्कि विकास की गति को आगे बढ़ाने वाला प्रमुख आधार बन रही है। उन्होंने कहा कि भारत को विश्व की शीर्ष खेल महाशक्तियों में स्थापित करना भी विकसित भारत के संकल्प का महत्वपूर्ण हिस्सा है। एक समय था जब अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत की उपस्थिति सीमित रहती थी, लेकिन आज भारतीय खिलाड़ियों के उत्कृष्ट प्रदर्शन की चर्चा वैश्विक स्तर पर हो रही है।