सांसद अनुराग सिंह ठाकुर के सक्रिय प्रयासों के फलस्वरूप हिमाचल प्रदेश की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हुई है। संस्कृति मंत्रालय ने कांगड़ा जिले के हरिपुर-गुलेर स्थित ऐतिहासिक मंदिरों तथा हमीरपुर जिले के सुजानपुर टीहरा किले में आवश्यक संरक्षण एवं जीर्णोद्धार कार्य करवाने की प्रतिबद्धता जताई है।
संस्कृति मंत्रालय के सचिव विवेक अग्रवाल द्वारा सांसद अनुराग सिंह ठाकुर को हाल ही में भेजे गए पत्र में इन कार्यों की जानकारी दी गई है। यह पहल अनुराग सिंह ठाकुर द्वारा 15 जुलाई 2026 को संस्कृति मंत्रालय को लिखे गए पत्र का परिणाम है, जिसमें उन्होंने हिमाचल प्रदेश की समृद्ध ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए तत्काल आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया था।
सुजानपुर टीहरा किले में होंगे महत्वपूर्ण संरक्षण कार्य
केंद्र द्वारा संरक्षित सुजानपुर टीहरा किले के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नए संरक्षण कार्य प्रस्तावित किए हैं। इनमें बारादरी तक पहुंचने के लिए एमएस रेलिंग सहित एप्रोच पाथवे का निर्माण तथा मुख्य प्रवेश द्वार परिसर की लकड़ी की छत की मरम्मत एवं पुनर्स्थापना शामिल है।
इसके अतिरिक्त किले का विस्तृत निरीक्षण किया जाएगा, जिसके आधार पर भविष्य में आवश्यक संरक्षण कार्यों के लिए विस्तृत अनुमान तैयार किए जाएंगे। इससे किले के संरक्षण एवं रखरखाव का कार्य चरणबद्ध तरीके से जारी रखा जा सकेगा। इससे पहले वर्ष 2022-23 में चामुंडा देवी मंदिर तथा मुख्य प्रवेश द्वार की संरचनाओं में आवश्यक मरम्मत कार्य करवाए गए थे।
हरिपुर के तीन ऐतिहासिक मंदिरों के संरक्षण को मंजूरी
कांगड़ा जिले के हरिपुर में स्थित गोवर्धन धारी मंदिर, सरस्वती देवी मंदिर और कल्याण राय मंदिर के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के महानिदेशक ने वार्षिक संरक्षण कार्यक्रम (ACP) को मंजूरी प्रदान कर दी है।
मंत्रालय द्वारा इन स्मारकों के लिए आवश्यक धनराशि शीघ्र ही असुरक्षित स्मारक मद के अंतर्गत एएसआई के शिमला सर्किल को जारी की जाएगी। गोवर्धन धारी मंदिर के लिए अनुमान पहले ही स्वीकृत हो चुका है, जबकि अन्य मंदिरों के संशोधित अनुमान तैयार किए जा रहे हैं।
संस्कृति मंत्रालय ने आश्वस्त किया है कि इन स्मारकों में संरक्षण एवं जीर्णोद्धार कार्य शीघ्र शुरू होने की उम्मीद है और चालू वित्तीय वर्ष के भीतर इन्हें पूरा करने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे।
यह कदम हिमाचल प्रदेश की ऐतिहासिक धरोहरों को संरक्षित करने के प्रति केंद्र सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। साथ ही, यह सुनिश्चित करेगा कि प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और संरक्षित रहे।