4 अप्रैल 1905 में हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में आए भूकंप से हुई मानवायी त्रासदी की याद में प्रदेश भर में सरकार के निर्देश पर चल रहे आपदा प्रबंधन जागरूकता कार्यक्रम के तहत शनिवार को एपीजी शिमला विश्वविद्यालय के कैंपस में सरघीन स्थित हिमाचल प्रदेश होम गार्ड की संयुक्त प्रशिक्षण संस्थान की ओर से होम गार्ड के जवानों, अधिकारियों और एपीजी शिमला विश्वविद्यालय की एनसीएस यूनिट के संयुक्त तत्वावधान में आपदा से निपटने के लिए मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। इस दौरान एनएसएस स्वयंसेवियों, छात्रों, शिक्षकों, पदाधिकारियों और स्टाफ को आपदा से बचाव तथा आपात स्थिति में सुरक्षित प्रतिक्रिया के लिए प्रशिक्षित किया गया। इस मॉक ड्रिल के दौरान होम गार्ड प्रशिक्षण संस्थान की ओर से प्लाटून कमांडर सुरेन्द्र चंद, प्लाटून कमांडर देशबंधु, प्लाटून कमांडर प्रेम सिंह, हवलदार अनिल कुमार, हवलदार मनोज कुमार, हवलदार ललित कुमार, हवलदार सुशीला देवी, गृह रक्षक सुंदर लाल, हिम्मत लाल, ब्रह्मदेव, महेंद्र कुमार, अर्जुनदास, नरेंद्र कुमार, कुलदीप कुमार, नीम चंद, सुनील कुमार और विजय कुमार की टीम ने एपीजी शिमला विश्वविद्यालय परिसर में मॉक ड्रिल और इवेक्युएशन ड्रिल का प्रदर्शन किया। इस अभ्यास में एनएसएस स्वयंसेवियों, छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और विश्वविद्यालय के स्टाफ को किसी भी आपदा व भूकंप की स्थिति में सुरक्षित तरीके से लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के तरीकों की लाइव डेमो देकर विस्तृत जानकारी दी गई। ड्रिल के माध्यम से यह समझाया गया कि किसी भी आपात स्थिति में घबराने के बजाय संयम बनाए रखना आवश्यक है। इसके साथ ही सुरक्षित रास्ते से बाहर निकलने, उपकरणों के सही उपयोग और प्राथमिक स्तर पर आपदा से निपटने के तरीकों के बारे में भी बताया गया। प्लाटून कमांडर सुरेन्द्र चंद और उनकी टीम ने छात्रों को बताया कि जागरूकता और उचित प्रशिक्षण से बड़ी से बड़ी भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा से होने वाले मानवीय नुकसान को कम किया जा सकता है। इस दौरान विश्वविद्यालय के एनएसएस स्वयंसेवियों, छात्र-छात्राओं और शिक्षकों ने पूरे उत्साह के साथ प्रशिक्षण में भाग लिया और आपदा से बचाव के तरीकों को समझा। मॉक ड्रिल के अंत में एपीजी शिमला विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार प्रो. डॉ. आर. एल. शर्मा ने मॉक ड्रिल में भाग लेने वाले छात्र छात्राओं, शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि प्राकृतिक आपदा या मानव द्वारा आपदा से बचने के लिए हमें प्रकृति के साथ संतुलन बनाए रखना होगा। भारत विकास और टेक्नोलॉजी में आगे बढ़ रहा है, लेकिन हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि विकास प्रकृति को नुकसान न पहुंचाए। प्रो. शर्मा ने कहा कि हम विकसित देशों से सीख सकते हैं कि कैसे प्राकृतिक आपदा से निपटना है। हमें अपनी नीतियों और योजनाओं में पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देनी होगी। हमें न केवल विकास पर ध्यान देना होगा, बल्कि प्रकृति के साथ संतुलन बनाए रखने पर भी ध्यान देना होगा। प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण, पर्यावरण अनुकूल विकास, आपदा प्रबंधन योजना, जन जागरूकता जैसे कदमों को उठाकर, किसी भी प्रकार की आपदा से बचा जा सकता है और एक सुरक्षित और समृद्ध मानव भविष्य बना सकते हैं। रजिस्ट्रार प्रो. डॉ. आर.एल. शर्मा, प्रो चांसलर प्रो. डॉ. रमेश चौहान, विश्वविद्यालय सलाहकार इंजीनियर सुमन विक्रांत, डीन एकेडमिक्स प्रो. डॉ. आनंदमोहन शर्मा, एसोसिएट डीन एकेडमिक्स डॉ. ज्योत्सना शर्मा, एनएसएस यूनिट के समन्वयक व प्रोग्राम ऑफिसर डॉ. प्यार सिंह, परीक्षा नियंत्रक अफजल खान, डीन डॉ. मनिंदर कौर, डॉ. भावना वर्मा, डॉ. विजयश्री, छात्र -हॉस्टल के वार्डन पंकज कुमार, छात्रा- होस्टल वार्डन किरण शर्मा, विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, शिक्षकों और स्टाफ ने होम गार्ड की टीम का आपदा से निपटने पर दिया गया प्रशिक्षण के लिए आभार व्यक्त किया। विश्वविद्यालय के सभी पदाधिकारियों ने आपदा प्रबंधन से संबंधित कार्यक्रमों को समय-समय पर आयोजित किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि आमजनों और विद्यार्थियों में सुरक्षा के प्रति जागरूकता बनी रहे।