हाल ही में मंडी से सांसद एवं भाजपा नेत्री कंगना रनौत द्वारा आंदोलन मे शामिल युवा जैन-ज़ी बच्चों के संदर्भ में की गई टिप्पणी अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण, असंवेदनशील और निंदनीय है। एक जनप्रतिनिधि से अपेक्षा की जाती है कि वह समाज के प्रत्येक वर्ग, विशेषकर युवाओं के प्रति सम्मानजनक भाषा का प्रयोग करे, न कि ऐसी भाषा का जो युवाओं खासकर बेटियों की भावनाओं को आहत करे।
उन्होंने कहा कि वो भारतीय राष्ट्रीय महिला कांग्रेस की पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के नाते, इस बयान की कड़ी भर्त्सना करती हूं। कंगना रनौत जैसी सार्वजनिक जीवन से जुड़ी नेत्री को इस प्रकार का शर्मनाक बयान नहीं देना चाहिए था। वह हिमाचल प्रदेश जैसे शांत, संस्कारी और सौहार्दपूर्ण राज्य का प्रतिनिधित्व करती हैं, जहां सदियों से महिलाओं के की परंपरा रही है। उनके शब्द केवल एक व्यक्ति के नहीं, बल्कि एक सांसद और राष्ट्रीय दल की प्रतिनिधि के शब्द माने जाते हैं।
भाजपा नेतृत्व को भी गंभीरता से आत्ममंथन करना चाहिए कि उसने मंडी जैसे महत्वपूर्ण संसदीय क्षेत्र से किस प्रकार की भाषा और सोच रखने वाले नेता को टिकट दिया। लोकतंत्र में चुनाव जीतना ही पर्याप्त नहीं होता; जनप्रतिनिधि का आचरण, संवेदनशीलता और भाषा भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।
मंडी की जागरूक जनता को भी यह सोचने की आवश्यकता है कि उनका सांसद भारत के युवाओं के लिए कैसी भाषा का प्रयोग कर रहा है। देश का युवा हमारी सबसे बड़ी शक्ति है। युवाओं को अपमानित करने वाली मानसिकता न केवल सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों को भी कमजोर करती है।
भारत के संविधान की मूल भावना समानता, गरिमा और सम्मान पर आधारित है। सार्वजनिक जीवन में बैठे लोगों को यह नहीं भूलना चाहिए कि उनके शब्द समाज में दूरगामी प्रभाव छोड़ते हैं। राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हो सकते हैं, लेकिन बच्चों या युवाओं के प्रति अपमानजनक टिप्पणी किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकती।
उन्होंने कहा की वो कंगना रनौत से अपेक्षा करती हैं कि वे अपने बयान पर सार्वजनिक रूप से खेद व्यक्त करें और भविष्य में अधिक जिम्मेदार एवं संवेदनशील भाषा का प्रयोग करें। साथ ही, भाजपा नेतृत्व को भी स्पष्ट करना चाहिए कि क्या वह ऐसी टिप्पणियों का समर्थन करता है या उनसे स्वयं को अलग मानता है। हिमाचल की संस्कृति संयम, सम्मान और सद्भाव की संस्कृति है। इसे विभाजनकारी और अपमानजनक भाषा से दूषित नहीं होने दिया जा सकता।