हिमाचल ओलंपिक संघ अगले एक वर्ष में 100 से अधिक कोच करेगा नियुक्त: अनुराग सिंह ठाकुर

2036 ओलंपिक में भारत को शीर्ष पांच में पहुंचाने के लिए केंद्र, राज्य, महासंघ, कॉरपोरेट और एनजीओ को मिलकर करना होगा काम

हिमाचल ओलंपिक संघ अगले एक वर्ष में 100 से अधिक कोच करेगा नियुक्त: अनुराग सिंह ठाकुर
पूर्व केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री, सांसद एवं हिमाचल प्रदेश ओलंपिक संघ के अध्यक्ष अनुराग सिंह ठाकुर ने नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित जज़्बा: जड़ों से शिखर तक कॉन्क्लेव में भारत को 2036 ओलंपिक में दुनिया के शीर्ष पांच खेल राष्ट्रों में शामिल करने के लिए जमीनी स्तर से विश्वस्तरीय खेल तंत्र विकसित करने पर जोर दिया। अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि भारत की ओलंपिक सफलता केवल केंद्र सरकार के बजट पर निर्भर नहीं हो सकती। खेलो इंडिया, SAI केंद्र और TOPS जैसी केंद्रीय पहल महत्वपूर्ण आधार प्रदान करती हैं, लेकिन प्रतिभा की पहचान, प्रशिक्षण और खिलाड़ियों के निरंतर विकास में राज्यों की निर्णायक भूमिका है। चूंकि खेल राज्य सूची का विषय है, इसलिए प्रत्येक राज्य में स्वतंत्र खेल विभाग, समर्पित सचिव और अलग बजट हेड होना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि राज्यों को सार्वजनिक स्पोर्ट्स डैशबोर्ड के माध्यम से खेल बजट को तीन हिस्सों में स्पष्ट करना चाहिए—खेल मैदानों, सिंथेटिक टर्फ और अकादमियों के लिए पूंजीगत व्यय; कोच एवं सपोर्ट स्टाफ के लिए परिचालन व्यय; तथा नियमित घरेलू प्रतियोगिताओं और जमीनी स्तर की लीगों के लिए सुनिश्चित धनराशि। उन्होंने हरियाणा, बिहार और ओडिशा में खेलों के लिए किए जा रहे लक्षित निवेश और विशेष व्यवस्थाओं का उल्लेख किया। हिमाचल प्रदेश ओलंपिक संघ के अध्यक्ष के रूप में बड़ी पहल की घोषणा करते हुए ठाकुर ने कहा कि अगले एक वर्ष में विभिन्न खेलों के 100 से अधिक कोच नियुक्त किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश के 12 जिलों में वर्तमान में लगभग 22–27 ऑन-रोल कोच हैं। HPOA विश्वस्तरीय कोचों के साथ स्पोर्ट्स साइंस विशेषज्ञों और फिजियोथेरेपिस्ट की सेवाएं भी उपलब्ध करवाएगा, ताकि हिमाचल के खिलाड़ियों को कॉमनवेल्थ, एशियन गेम्स और ओलंपिक स्तर की तैयारी मिल सके। उन्होंने कहा कि ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों की प्रतिभाओं को बेहतर प्रशिक्षण और सुविधाएं देना आवश्यक है तथा संसाधनों की कमी खेल प्रतिभाओं के विकास में बाधा नहीं बननी चाहिए। उन्होंने धर्मशाला इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम के निर्माण के अपने अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि विजन, जवाबदेही और इच्छाशक्ति से बड़े खेल लक्ष्यों को हासिल किया जा सकता है। अनुराग सिंह ठाकुर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाड़ियों के साथ व्यक्तिगत जुड़ाव का उल्लेख करते हुए कहा कि खिलाड़ी उन्हें PM यानी Prime Minister के साथ-साथ Param Mitra के रूप में देखते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री खिलाड़ियों से अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं से पहले और बाद में सीधे संवाद करते हैं तथा उनकी दिनचर्या, खान-पान और पारिवारिक पृष्ठभूमि तक में रुचि लेते हैं। उन्होंने बताया कि 2014 से पहले लगभग ₹800 करोड़ का केंद्रीय खेल बजट आज करीब ₹4,400 करोड़ हो चुका है। साथ ही, 2026-27 से 2030-31 तक खेलो इंडिया के लिए ₹36,441 करोड़ का प्रावधान किया गया है। ठाकुर ने भारत के खेल भविष्य के लिए पांच प्रमुख स्तंभ बताए—केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय मानक और सहयोग, राज्य सरकारों द्वारा जमीनी ढांचा एवं प्रतिभा खोज, खेल महासंघों द्वारा खिलाड़ियों को प्राथमिकता, कॉरपोरेट सेक्टर द्वारा CSR का अकादमियों और कोचिंग में रणनीतिक उपयोग तथा व्यक्तियों और एनजीओ द्वारा समुदाय स्तर पर प्रतिभा खोज। उन्होंने कहा कि 5 से 15 वर्ष के बच्चों में KIRTI जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से शुरुआती निवेश और प्रतिभा पहचान पर जोर देना होगा। केवल पदक जीतने के बाद खिलाड़ियों को सम्मानित करने के बजाय उन्हें बचपन से वैज्ञानिक प्रशिक्षण, बेहतर कोचिंग और पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध करवानी होंगी। इन पांचों स्तंभों के समन्वित प्रयास से भारत 2036 ओलंपिक के लिए मजबूत खेल पारिस्थितिकी तंत्र तैयार कर सकता है।