‘अपना परिवार सुखी परिवार’ और ‘इंदिरा गांधी मातृ शिशु संकल्प योजना’ 2 अक्तूबर से शुरू की जाएगी
‘अपना परिवार सुखी परिवार’ और ‘इंदिरा गांधी मातृ शिशु संकल्प योजना’ 2 अक्तूबर से शुरू की जाएगी
मुख्यमंत्री ने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के बकाया वेतन के लिए अतिरिक्त 20,000 रुपये देने की घोषणा की
2016 से 2021 के बीच सेवानिवृत्त हुए तृतीय श्रेणी पेंशनरों को 35 प्रतिशत तथा प्रथम एवं द्वितीय श्रेणी पेंशनरों को 15 प्रतिशत बकाया मिलेगा
मुख्यमंत्री ने जल शक्ति विभाग में 4,000 पद भरने की घोषणा की
अगले दो वर्षों में दुग्ध प्रसंस्करण अधोसंरचना पर 150 करोड़ रुपये खर्च करेगी राज्य सरकारः मुख्यमंत्री
एमटीडब्ल्यू और आउटसोर्स कर्मचारियों से जुड़े सभी पहलुओं पर गंभीरता से किया जा रहा विचार
मुख्यमंत्री ने राज्य स्तरीय स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर बड़सर में राष्ट्रीय ध्वज फहराया, परेड की सलामी ली
गई हैं। इन परिवारों के लिए राज्य सरकार 2 अक्तूबर से ‘अपना परिवार सुखी परिवार’ योजना शुरू करेगी। इसके तहत अगले दो वर्षों में इन परिवारों की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए एक तंत्र स्थापित किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि सभी उपायुक्तों को निर्देश दिए गए हैं कि अगले दो माह के भीतर योजना के अंतर्गत आने वाले प्रत्येक परिवार की आवश्यकताओं का आकलन किया जाए। इससे प्रत्येक परिवार को आवश्यक विशेष सहायता की पहचान करने में मदद मिलेगी। केन्द्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं को इन परिवारों पर केन्द्रित किया जाएगा ताकि वे उपलब्ध अवसरों और कल्याणकारी योजनाओं का पूरा लाभ उठा सकें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मैंने इन 1.80 लाख परिवारों की सेवा और कल्याण के लिए पूरी तरह समर्पित रहने का संकल्प लिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इनमें से आधे से अधिक परिवार पहले से ही बीपीएल सूची में शामिल हैं, जबकि कुछ परिवार वर्तमान में इसके अंतर्गत नहीं आते। उन्होंने आश्वासन दिया कि राज्य सरकार बीपीएल परिवारों को दिए जा रहे किसी भी लाभ को न तो कम करेगी और न ही वापस लेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ विपक्षी नेता यह भ्रामक सूचना फैला रहे हैं कि सरकार बीपीएल परिवारों की संख्या कम करना चाहती है। उन्होंने कहा कि यह आरोप पूरी तरह गलत और निराधार हैं। बीपीएल सूची जैसी है वैसी ही रहेगी और इन परिवारों को दिए जा रहे सभी मौजूदा लाभ जारी रहेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने पहली बार राज्य के वित्तीय संसाधनों को मजबूत करने के लिए व्यवस्थित दृष्टिकोण अपनाया है और हिमाचल प्रदेश को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निर्णायक कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि 16वें वित्त आयोग ने लगभग 8,000 से 10,000 करोड़ रुपये के राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) को बंद कर दिया है, जो राज्य को वर्ष 1952 से संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत मिल रहा था।
उन्होंने कहा कि इस निर्णय से राज्य के गंभीर वित्तीय संकट में जाने की आशंका व्यक्त की गई थी। हालांकि, मुझे यह कहते हुए प्रसन्नता है कि हिमाचल प्रदेश इस कठिन परिस्थिति से सफलतापूर्वक बाहर निकल आया है। उन्होंने कहा कि हमारे निरंतर प्रयासों से राज्य अब लगातार वित्तीय आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि केन्द्र सरकार के नेता बार-बार यह दावा करते रहे हैं कि राज्य सरकार कर्मचारियों और पेंशनरों के वेतन एवं पेंशन का भुगतान करने में सक्षम नहीं है। उन्होंने कहा कि मैं यह बिल्कुल स्पष्ट करना चाहता हूं कि वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के हमारे प्रयासों के तहत ऐसी स्थिति केवल एक बार, छह दिनों की अवधि के लिए उत्पन्न हुई थी। हिमाचल प्रदेश अब अपने पैरों पर मजबूती से खड़ा है।
श्री सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार भाखड़ा परियोजना से संबंधित लगभग 7,000 करोड़ रुपये के अपने दावे को भी दृढ़ता और ईमानदारी के साथ आगे बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि राज्य को सर्वाेच्च न्यायालय के समक्ष लंबित इस मामले में अनुकूल परिणाम की उम्मीद है। इसी प्रकार शानन, बैरास्यूल, जल उपकर और चंडीगढ़ से जुड़े मामलों में हिमाचल प्रदेश के वैध अधिकारों को सुरक्षित करने के प्रयास भी जारी हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इन निरंतर प्रयासों से राज्य के हितों और अधिकारों की रक्षा में मदद मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व भाजपा सरकार इन महत्वपूर्ण मुद्दों के प्रति उदासीन रही। हमारी सरकार हिमाचल प्रदेश के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और राज्य के वैध अधिकारों से कभी समझौता नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि यह भी ‘व्यवस्था परिवर्तन’ का एक उदाहरण है, क्योंकि राज्य सरकार ने केन्द्र सरकार और न्यायालयों के समक्ष हिमाचल प्रदेश के वैध दावों को मजबूती से उठाया है और राज्य के अधिकारों एवं हितों की रक्षा के लिए कड़े कदम उठाए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोगों के सक्रिय सहयोग और समर्थन से हमारी सरकार ने ‘चिट्टा-मुक्त हिमाचल अभियान’ शुरू किया है। अभियान का दूसरा चरण 7 सितंबर, 2026 से ऊना से शुरू किया जाएगा। जल्द ही ‘खेलो हिमाचल, चिट्टा-मुक्त अभियान’ भी शुरू किया जाएगा, जिसके माध्यम से युवाओं को खेलों से जुड़ने और स्वस्थ एवं उत्पादक जीवन शैली अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि ड्रग माफिया को खत्म करने और हिमाचल प्रदेश को नशा-मुक्त राज्य बनाने के लिए सख्त फैसले लिए जा रहे हैं।
श्री सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार प्रत्येक नागरिक को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध करवाने के लिए कार्य कर रही है। सभी विधानसभा क्षेत्रों में स्वच्छ पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 2,000 करोड़ रुपये की व्यापक योजना लागू की जा रही है। साथ ही मौजूदा जल ढांचे को मजबूत और पुनर्निर्मित करने तथा भू-जल पुनर्भरण को बढ़ावा देने के लिए कई पहल की जा रही हैं। इन उपायों से पानी की उपलब्धता और गुणवत्ता में सुधार होगा तथा राज्य की समग्र जल सुरक्षा मजबूत होगी।
उन्होंने कहा कि धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मंडी जिले में माता बगलामुखी रोपवे जनता को समर्पित किया गया है। चिंतपूर्णी मंदिर और बाबा बालक नाथ मंदिर में भी रोपवे का निर्माण किया जाएगा, जबकि मंडी में शिव धाम का कार्य पहले ही शुरू हो चुका है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के इतिहास में पहली बार सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को शैक्षणिक भ्रमण के लिए विदेश भेजा गया है। विद्यार्थियों के अलावा 200 शिक्षकों को भी वैश्विक स्तर की सर्वाेत्तम कार्यप्रणालियों का अध्ययन करने और उन्हें हिमाचल प्रदेश की शिक्षा प्रणाली में अपनाने के तरीकों का पता लगाने के लिए विदेश भेजा गया है। उन्होंने कहा कि आगामी वर्षों में राज्य सरकार स्कूलों और तकनीकी शिक्षा संस्थानों के मेधावी विद्यार्थियों के साथ-साथ डॉक्टरों के लिए भी विदेश में शैक्षणिक भ्रमण की सुविधा उपलब्ध करवाएगी।
उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार भी राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। मरीजों को विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं और आधुनिक चिकित्सा उपकरण उपलब्ध करवाने के लिए ऐतिहासिक कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में पहली बार सभी मेडिकल कॉलेजों के साथ-साथ चमियाणा अस्पताल में रोबोटिक सर्जरी की सुविधा शुरू की गई है।
इसे स्वास्थ्य क्षेत्र की क्रांतिकारी पहल बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस सुविधा से प्रदेश के लोगों को राज्य के भीतर ही उन्नत चिकित्सा तकनीक उपलब्ध हो सकेगी। उन्होंने कहा कि निजी अस्पतालों में रोबोटिक सर्जरी की लागत आमतौर पर 5 लाख रुपये से अधिक होती है, जबकि राज्य सरकार सरकारी संस्थानों में यह सुविधा 30,000 रुपये से 80,000 रुपये की लागत में उपलब्ध करवा रही है। इससे आम लोगों के लिए उन्नत उपचार सुलभ हो सकेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के प्रमुख स्वास्थ्य संस्थान आईजीएमसी शिमला को और मजबूत किया जा रहा है तथा मरीज-केन्द्रित सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है ताकि लोगों को बेहतर विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाई जा सकें।
इस अवसर पर राज्य योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष भवानी सिंह पठानिया, विधायक संजय रतन, सुरेश कुमार, विवेक शर्मा और इन्द्र दत्त लखनपाल, मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार सुनील कुमार शर्मा, पूर्व विधायक मंजीत डोगरा, हिमाचल प्रदेश राज्य वन विकास निगम के अध्यक्ष केहर सिंह खाची, हिमाचल प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष नरदेव कंवर, हिमाचल प्रदेश ओबीसी वित्त एवं विकास निगम के उपाध्यक्ष डॉ. मोहन लाल, कांगड़ा सहकारी प्राथमिक कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक के अध्यक्ष राम चंद्र पठानिया, हिमाचल प्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड के अध्यक्ष कुलदीप पठानिया, नशा मुक्ति बोर्ड के समन्वयक नरेश कुमार, उप समन्वयक संजय भारद्वाज, एपीएमसी अध्यक्ष अजय शर्मा, हिमाचल प्रदेश पूर्व सैनिक निगम के अध्यक्ष कर्नल मनीष कुमार, जिला कांग्रेस कमेटी हमीरपुर की अध्यक्ष सुमन भारती, वूल फेडरेशन के अध्यक्ष मनोज ठाकुर, कांग्रेस नेता पुष्पेंद्र वर्मा, सुभाष ढटवालिया और रूबल ठाकुर, मुख्य सचिव के.के. पंत, पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी, उपायुक्त गंधर्वा राठौर, पुलिस अधीक्षक बलबीर ठाकुर तथा अन्य गणमान्य उपस्थित थे।