भारत की UPI क्रांति: एक दशक में डिजिटल भुगतान क्षेत्र में अभूतपूर्व विस्तार

स्थानीय नवाचार से वैश्विक पहचान तक पहुँचा UPI, ₹314 लाख करोड़ के लेन-देन ने रचा नया इतिहास: अनुराग सिंह ठाकुर

भारत की UPI क्रांति: एक दशक में डिजिटल भुगतान क्षेत्र में अभूतपूर्व विस्तार
पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने भारत के डिजिटल भुगतान क्षेत्र में आई ऐतिहासिक क्रांति के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि पिछले एक दशक में UPI ने भारत की तकनीकी क्षमता, नवाचार और डिजिटल अर्थव्यवस्था को नई वैश्विक पहचान दिलाई है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को UPI की लॉन्चिंग की 10वीं वर्षगांठ पर बधाई देते हुए कहा कि एक दशक पहले शुरू हुआ यह स्वदेशी डिजिटल भुगतान माध्यम आज दुनिया के सबसे प्रभावशाली फिनटेक नवाचारों में शामिल हो चुका है। अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में ऐसी उपलब्धि हासिल की है, जिसने न केवल देश के करोड़ों नागरिकों के दैनिक जीवन को आसान बनाया है, बल्कि भारत को वैश्विक फिनटेक क्षेत्र में एक अग्रणी शक्ति के रूप में स्थापित किया है। UPI आज आत्मनिर्भर और तकनीकी रूप से सक्षम भारत की क्षमता का सशक्त उदाहरण है। उन्होंने कहा कि UPI की सफलता का पैमाना इसके लेन-देन के आंकड़ों से स्पष्ट होता है। वित्त वर्ष 2016-17 में जहां UPI के माध्यम से मात्र 1.78 करोड़ लेन-देन हुए थे, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह संख्या बढ़कर लगभग 24,162 करोड़ लेन-देन तक पहुंच गई। इसी अवधि में UPI के माध्यम से होने वाले लेन-देन का कुल मूल्य लगभग ₹7,000 करोड़ से बढ़कर करीब ₹314 लाख करोड़ हो गया। यह अभूतपूर्व वृद्धि देशवासियों और व्यापारिक समुदाय के बीच डिजिटल भुगतान के प्रति बढ़ते विश्वास, स्वीकार्यता और निर्भरता को दर्शाती है। अनुराग ठाकुर ने कहा कि UPI की उपलब्धि केवल भारत तक सीमित नहीं है। भारत का यह स्वदेशी डिजिटल भुगतान मॉडल अब 11 देशों में संचालित हो रहा है। वैश्विक स्तर पर UPI की बढ़ती स्वीकार्यता भारत की तकनीकी क्षमता, डिजिटल बुनियादी ढांचे की मजबूती और इस व्यवस्था की व्यापक उपयोगिता एवं विस्तार क्षमता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि UPI ने भारत को डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में दुनिया के सामने एक नया मॉडल प्रस्तुत करने में सक्षम बनाया है। यह उपलब्धि आत्मनिर्भर भारत, डिजिटल इंडिया और तकनीक आधारित समावेशी विकास की दिशा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन की सफलता को भी प्रदर्शित करती है।