वंदे मातरम् के सम्मान और स्वतंत्रता संग्राम की विरासत की रक्षा का संकल्प राष्ट्रीय सम्मान का प्रश्न: अनुराग ठाकुर

वंदे मातरम् केवल गीत नहीं, बल्कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम, बलिदान और राष्ट्रीय चेतना की आवाज है: अनुराग ठाकुर

वंदे मातरम् के सम्मान और स्वतंत्रता संग्राम की विरासत की रक्षा का संकल्प राष्ट्रीय सम्मान का प्रश्न: अनुराग ठाकुर
पूर्व केंद्रीय कैबिनेट मंत्री एवं सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने भारतीय जनता पार्टी द्वारा वंदे मातरम् के सम्मान, गरिमा और ऐतिहासिक विरासत की रक्षा को लेकर पारित प्रस्ताव का स्वागत किया है। उन्होंने 19 अगस्त 2026 को कांग्रेस वर्किंग कमेटी द्वारा 1937 के उस प्रस्ताव को दोबारा पुष्ट किए जाने की कड़ी निंदा की, जिसके तहत राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के गायन को केवल प्रथम दो अंतरों तक सीमित रखने की बात कही गई थी। अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत माता के प्रति समर्पण की अमर अभिव्यक्ति, स्वतंत्रता संग्राम का मंत्र और भारत की राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक है। वंदे मातरम् की विरासत को वोट बैंक की राजनीति और राजनीतिक तुष्टीकरण की गणित का विषय नहीं बनाया जा सकता। कांग्रेस को यह समझना चाहिए कि स्वतंत्रता संग्राम और उसके प्रतीक किसी राजनीतिक दल की विरासत नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र की साझा धरोहर हैं। उन्होंने कहा कि 1937 की राजनीतिक परिस्थितियों को स्वतंत्र भारत की संवैधानिक एवं विधायी व्यवस्था से ऊपर नहीं रखा जा सकता। संविधान सभा ने 1950 में वंदे मातरम् के विशेष स्थान और ऐतिहासिक महत्व को स्वीकार किया था। वहीं, वर्ष 2026 में संसद द्वारा बनाए गए कानून ने राष्ट्रगीत को राष्ट्रगान के साथ वैधानिक संरक्षण प्रदान किया है। अनुराग ठाकुर ने कहा कि किसी राजनीतिक दल की वर्किंग कमेटी का प्रस्ताव देश की संवैधानिक संस्थाओं और संसद द्वारा बनाए गए कानूनों से ऊपर नहीं हो सकता। स्वतंत्रता से पहले हुए किसी राजनीतिक समझौते के आधार पर वंदे मातरम् की ऐतिहासिक विरासत को सीमित करने का प्रयास न केवल इतिहास की दृष्टि से अनुचित है, बल्कि दुर्भाग्यपूर्ण भी है। उन्होंने कहा कि भाजपा का प्रस्ताव देश को यह स्मरण कराता है कि वंदे मातरम् किसी राजनीतिक दल या चुनावी गणित तक सीमित नहीं है। यह भारत के सम्मान और उन असंख्य स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान से जुड़ा विषय है, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी औपनिवेशिक शासन ने भी वंदे मातरम् की शक्ति को पहचाना था और इसके प्रभाव को रोकने का प्रयास किया, क्योंकि इन शब्दों ने भारतीयों के भीतर प्रतिरोध और स्वतंत्रता की भावना को जागृत किया था। स्वतंत्रता सेनानियों की पीढ़ियों ने वंदे मातरम् को स्वतंत्रता, त्याग, साहस और राष्ट्रगौरव के मंत्र के रूप में अपनाया। अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस को वंदे मातरम् की ऐतिहासिक महत्ता पर चिंतन करना चाहिए, न कि स्वतंत्रता-पूर्व काल के राजनीतिक प्रस्ताव के माध्यम से इसकी विरासत को सीमित करने का प्रयास करना चाहिए। वंदे मातरम् के शब्दों ने कभी एक सोए हुए राष्ट्र को जगाया था और एक साम्राज्य की नींव हिला दी थी। स्वतंत्रता संग्राम ने इन शब्दों को साहस, बलिदान और संघर्ष का प्रतीक बनाया। इस विरासत को आज की वोट बैंक की राजनीति की गणित में सीमित नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम प्रत्येक भारतीय की साझा विरासत है और वंदे मातरम् जिस राष्ट्रीय चेतना का प्रतिनिधित्व करता है, वह भी प्रत्येक भारतीय की साझा धरोहर है। अनुराग ठाकुर ने कहा कि भाजपा वंदे मातरम् के इतिहास, अर्थ और राष्ट्रीय महत्व को देश के हर कोने तक ले जाएगी। विशेष रूप से युवा पीढ़ी को यह बताया जाएगा कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान वंदे मातरम् ने किस प्रकार करोड़ों भारतीयों में राष्ट्रभक्ति और बलिदान की भावना को जागृत किया। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को यह समझाना आवश्यक है कि इन शब्दों में ऐसी शक्ति क्यों थी, जिससे एक साम्राज्य तक भयभीत हो गया था। इस इतिहास का संरक्षण केवल अतीत को याद करना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् की भावना भारत की स्वतंत्रता से लेकर विकसित भारत की यात्रा तक निरंतर जुड़ी हुई है। 1947 में भारत की स्वतंत्रता के विजयघोष में वंदे मातरम् की भावना थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जब भारत 2047 तक विकसित भारत के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है, तब राष्ट्रगौरव, एकता, त्याग और सेवा की वही भावना देश की यात्रा का मार्गदर्शन करेगी। उन्होंने कहा कि 2047 में विकसित भारत का उद्घोष भी वंदे मातरम् की उसी राष्ट्रीय चेतना और राष्ट्रगौरव की भावना से प्रेरित होगा। अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा, “वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं है; यह भारत के स्वतंत्रता संग्राम, बलिदान और राष्ट्रीय चेतना की आवाज है। यह हमारे राष्ट्र की सामूहिक स्मृति का अभिन्न हिस्सा है। वंदे मातरम् के सम्मान और ऐतिहासिक विरासत से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता।”