सुक्खू सरकार ने हिमाचल को कंगाली के कगार पर पहुंचाया : राजेंद्र राणा

सुक्खू सरकार ने हिमाचल को कंगाली के कगार पर पहुंचाया : राजेंद्र राणा
हिमाचल प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ प्रवक्ता और सुजानपुर के पूर्व विधायक राजेंद्र राणा ने प्रदेश की बिगड़ती आर्थिक स्थिति को लेकर प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि हाल ही में प्रदेश के वित्त सचिव द्वारा सरकार को सौंपी गई आंतरिक रिपोर्ट से साफ जाहिर हो गया है कि हिमाचल प्रदेश गंभीर वित्तीय संकट के दौर से गुजर रहा है और हालात लगातार बद से बदतर होते जा रहे हैं। यहां जारी एक बयान में राजेंद्र राणा ने कहा कि स्थिति इतनी चिंताजनक हो चुकी है कि सरकार के पास कर्मचारियों को महंगाई भत्ते की किस्तें देने, लंबित एरियर चुकाने और यहां तक कि पहले से लिए गए कर्ज की अदायगी तक के लिए धन उपलब्ध नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह संकट प्राकृतिक नहीं, बल्कि सरकार की गलत नीतियों, आर्थिक कुप्रबंधन और फिजूलखर्ची का परिणाम है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सत्ता में आते ही सरकारी खजाने का दुरुपयोग किया है। जनता के पैसे को विकास कार्यों में लगाने के बजाय अपने करीबियों और मित्रों पर लुटाया गया। राणा ने आरोप लगाया कि सरकार ने रेवड़ियों की तरह पद और सुविधाएं बांटी हैं, जिससे प्रदेश का वित्तीय ढांचा पूरी तरह चरमरा गया है। राजेंद्र राणा ने कहा कि जो मुख्यमंत्री वर्ष 2027 तक हिमाचल को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का सपना दिखा रहे थे, आज उन्हीं के कार्यकाल में प्रदेश दिवालियापन की कगार पर खड़ा है। कर्मचारियों, पेंशनरों और आम जनता को अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, जबकि सरकार जमीनी हकीकत से आंखें मूंदे बैठी है। उन्होंने कहा कि एक हिमाचली होने के नाते उन्हें यह स्थिति बेहद पीड़ादायक लगती है। प्रदेश की साख पूरे देश में गिर रही है, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। राणा ने दो टूक शब्दों में कहा कि अब प्रदेश हित में केवल दो ही रास्ते बचे हैं — या तो मुख्यमंत्री नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तुरंत इस्तीफा दें, या फिर केंद्र सरकार को हस्तक्षेप कर प्रदेश की आर्थिक स्थिति को देखते हुए राष्ट्रपति शासन लागू करने पर विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भाजपा कार्यकर्ता जनता की आवाज बनकर इस मुद्दे को सड़क से सदन तक मजबूती से उठाएंगे और प्रदेश की जनता के हितों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होने दिया जाएगा।