प्रदेश सरकार द्वारा विधायक निधि पर रोक लगाए जाने के निर्णय को लेकर बड़सर विधानसभा क्षेत्र के विधायक इंद्रदत्त लखनपाल ने मुख्यमंत्री पर तीखा और स्पष्ट हमला बोला है। उन्होंने इस फैसले को प्रदेश की जनता के साथ खुला विश्वासघात बताते हुए कहा कि यह निर्णय किसी आर्थिक विवशता का परिणाम नहीं, बल्कि सत्ता के अहंकार में डूबी सरकार की तानाशाही, अलोकतांत्रिक और पूरी तरह जनविरोधी मानसिकता को उजागर करता है।
लखनपाल ने कहा कि विधायक निधि कोई राजनीतिक अनुदान नहीं, बल्कि आम जनता के छोटे लेकिन अत्यंत आवश्यक विकास कार्यों की जीवनरेखा है। इसके माध्यम से गांवों में सड़कें, पेयजल योजनाएं, स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं, स्वास्थ्य केंद्रों का सुदृढ़ीकरण तथा खेल और सामाजिक विकास से जुड़े कार्य पूरे होते हैं। इस निधि पर रोक लगाना सीधे तौर पर गांव, गरीब, किसान, मजदूर, युवा और महिलाओं के अधिकारों पर हमला है।
उन्होंने कहा कि यदि आज प्रदेश आर्थिक संकट में है, तो इसके लिए प्रदेश की जनता नहीं बल्कि मुख्यमंत्री स्वयं जिम्मेदार हैं। गलत नीतियां, अव्यवहारिक निर्णय, दूरदर्शिता की कमी और सत्ता-केन्द्रित राजनीति ने प्रदेश को वित्तीय संकट में धकेला है। मुख्यमंत्री को अपनी नीतियों पर आत्ममंथन करना चाहिए था, लेकिन उन्होंने अपनी प्रशासनिक विफलताओं का बोझ जनता और विकास कार्यों पर डाल दिया।
लखनपाल ने आरोप लगाया कि एक ओर सरकार आर्थिक तंगी का बहाना बनाकर विधायक निधि रोक रही है, वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री अपने समर्थकों को सलाहकार, चेयरमैन और विभिन्न सरकारी पदों पर नियुक्त कर सरकारी खजाने पर करोड़ों रुपये का अतिरिक्त बोझ डाल रहे हैं। यदि सरकार वास्तव में प्रदेश हितैषी होती, तो सबसे पहले अनावश्यक नियुक्तियों और फिजूलखर्ची पर रोक लगाती।
उन्होंने कहा कि यह निर्णय विपक्षी विधायकों को कमजोर करने और जनता का ध्यान सरकार की विफलताओं से भटकाने का प्रयास है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय जनता पार्टी इस तानाशाही और जनविरोधी फैसले के खिलाफ न झुकेगी और न ही चुप बैठेगी। बड़सर विधानसभा क्षेत्र की जनता के अधिकारों की लड़ाई पूरी मजबूती से लड़ी जाएगी।
लखनपाल ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने तत्काल विधायक निधि बहाल नहीं की, तो भाजपा प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू करेगी। सड़क से लेकर विधानसभा तक सरकार की नाकामियों को उजागर किया जाएगा और जनता के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी।
अंत में उन्होंने कहा कि बड़सर विधानसभा क्षेत्र की जनता के सम्मान, विकास और अधिकारों से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जाएगा। सत्ता के अहंकार में लिया गया हर फैसला अंततः जनता की अदालत में परखा जाएगा।